मुजफ्फरनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भोपा में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया के औचक निरीक्षण में छह स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित पाए गए। मामले में स्पष्टीकरण तलब किया गया है। यह कार्रवाई सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही और समयबद्ध चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
📍 मुजफ्फरनगर
📰 15 जुलाई 2026
✍️ वसी सिद्दीकी
सीएचसी भोपा निरीक्षण में छह स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित, स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही पर फिर उठे सवाल
औचक निरीक्षण में सामने आई लापरवाही
जनपद मुजफ्फरनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भोपा में बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, ओपीडी संचालन, दवा उपलब्धता, अभिलेखों के रखरखाव और कर्मचारियों की उपस्थिति का जायज़ा लिया गया। इसी दौरान महिला चिकित्सक समेत छह स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिसके बाद तत्काल स्पष्टीकरण तलब कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
महिला चिकित्सक सहित छह कर्मचारी मिले गैरहाजिर
निरीक्षण के दौरान डॉ. यशस्वी जैन, स्टाफ नर्स सुप्रिया सिंह, दीपा, प्रवीण, ग्लोरियस तथा लैब टेक्नीशियन विपिन अनुपस्थित पाए गए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी संबंधित कर्मचारियों से तत्काल जवाब लिया जाए। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला तो उनके विरुद्ध सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक को सौंपी जिम्मेदारी
सीएमओ ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय कुमार को निर्देश दिए कि अनुपस्थित कर्मचारियों से तुरंत स्पष्टीकरण प्राप्त कर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करें। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करने को कहा गया।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर जोर
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और दवाओं की उपलब्धता का भी परीक्षण किया गया। सीएमओ ने मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक मरीज को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। शासन की मंशा के अनुरूप किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
औचक निरीक्षण क्यों हैं महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में औचक निरीक्षण केवल अनुपस्थित कर्मचारियों की पहचान तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनका उद्देश्य पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यक्षमता का आकलन करना भी होता है। ऐसे निरीक्षणों से समयपालन, जवाबदेही और सेवा गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ती है।
हालांकि केवल कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं माना जाता। स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अस्पतालों में पर्याप्त मानव संसाधन, नियमित प्रशिक्षण और प्रभावी निगरानी तंत्र भी उतने ही आवश्यक हैं, ताकि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।
जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में संकेत
हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दे रही है। नियमित निरीक्षण, डिजिटल मॉनिटरिंग और उपस्थिति की समीक्षा जैसे कदम इसी नीति का हिस्सा हैं। भोपा सीएचसी का यह निरीक्षण भी उसी प्रशासनिक रणनीति की कड़ी माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है।
आगे क्या होगा
अब सभी अनुपस्थित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण प्राप्त होने के बाद स्वास्थ्य विभाग उनके उत्तर का परीक्षण करेगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो विभागीय नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही अस्पताल की कार्यप्रणाली की निगरानी भी आगे और सख्त किए जाने की संभावना है।
संपादकीय दृष्टिकोण
भोपा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण यह संकेत देता है कि स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पतालों में अनुशासन और जवाबदेही को लेकर गंभीर है। हालांकि किसी भी निरीक्षण की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब इसका असर अस्पतालों में नियमित उपस्थिति, बेहतर कार्य संस्कृति और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में दिखाई दे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।